माँ दुर्गा के 108 नाम (अष्टोत्तर शतनामावली) इस प्रकार हैं:
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ दुर्गायै नमः: जो दुर्गम और दुखों को हरने वाली हैं।
ॐ शिवायै नमः: जो कल्याणकारी हैं।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः: जो महालक्ष्मी के रूप में हैं।
ॐ महागौर्यै नमः: जो अत्यंत उज्ज्वल और निर्मल हैं।
ॐ चण्डिकायै नमः: जो भयानक रूप धारण करने वाली हैं।
ॐ सर्वज्ञायै नमः: जो सब कुछ जानने वाली हैं।
ॐ सर्वालोकेशायै नमः: जो सभी लोकों की स्वामिनी हैं।
ॐ सर्वकर्मफलप्रदायै नमः: जो सभी कर्मों का फल देने वाली हैं।
ॐ सर्वतीर्थमयी नमः: जो सभी तीर्थों के समान पवित्र हैं।
ॐ सर्वमंगलायै नमः: जो सभी के लिए मंगलकारी हैं।
ॐ सर्ववेदमयी नमः: जो सभी वेदों का स्वरूप हैं।
ॐ सुप्रभायै नमः: जो अत्यंत तेजस्वी हैं।
ॐ सर्वोर्जितायै नमः: जो सबसे ऊपर और श्रेष्ठ हैं।
ॐ सर्वसिद्धायै नमः: जो सभी सिद्धियों को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायै नमः: जो सभी प्रकार की संपत्ति प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्पतये नमः: जो सभी संपत्तियों की स्वामिनी हैं।
ॐ सर्वदेवायै नमः: जो सभी देवों का रूप हैं।
ॐ सर्वदानुजितायै नमः: जो सभी दानों से जीती हुई हैं।
ॐ सर्वदुःखहरायै नमः: जो सभी दुखों को हरने वाली हैं।
ॐ सर्वकामप्रदायै नमः: जो सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।
ॐ सर्वकामफलायै नमः: जो सभी इच्छाओं का फल देती हैं।
ॐ सर्वकामदायै नमः: जो सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं।
ॐ सर्वकामपूजित्यायै नमः: जो सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पूजी जाती हैं।
ॐ सर्वकाममोचिन्यै नमः: जो सभी इच्छाओं से मुक्ति देती हैं।
ॐ सर्वकामप्रियायै नमः: जो सभी इच्छाओं को प्रिय हैं।
ॐ सर्वकामसंपाध्यायै नमः: जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं।
ॐ सर्वकामसंभव्यायै नमः: जो सभी इच्छाओं को संभव करती हैं।
ॐ सर्वकामसिद्धयै नमः: जो सभी इच्छाओं की सिद्धि देती हैं।
ॐ सर्वकामनिधानयै नमः: जो सभी इच्छाओं का भंडार हैं।
ॐ सर्वकामवर्धिन्यै नमः: जो सभी इच्छाओं को बढ़ाती हैं।
ॐ सर्वकामप्रदायै नमः: जो सभी इच्छाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वकामात्मिकायै नमः: जो सभी इच्छाओं की आत्मा हैं।
ॐ सर्वकामसम्पत्यै नमः: जो सभी इच्छाओं की संपदा हैं।
ॐ सर्वकामदात्रे नमः: जो सभी इच्छाओं को देती हैं।
ॐ सर्वकामयज्ञायै नमः: जो सभी इच्छाओं के यज्ञ का फल देती हैं।
ॐ सर्वकामयज्ञफलदायै नमः: जो सभी इच्छाओं के यज्ञ का फल देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायै नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्तिभृते नमः: जो सभी संपदाओं को धारण करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की स्वामिनी हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्पूर्णायै नमः: जो सभी संपदाओं से पूर्ण हैं।
ॐ सर्वसम्पत्समिपत्यै नमः: जो सभी संपदाओं को पास लाती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पतप्रदायिन्यै नमः: जो सभी संपदाओं को देने वाली हैं।
ॐ सर्वसम्पत्समृद्धायै नमः: जो सभी संपदाओं से समृद्ध हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखप्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सम्पन्नयै नमः: जो सभी संपदाओं से संपन्न हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदधिष्ठानयै नमः: जो सभी संपदाओं का अधिष्ठान हैं।
ॐ सर्वसम्पदविद्ये नमः: जो सभी संपदाओं की विद्या हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सद्गतिदायै नमः: जो सभी संपदाओं की सद्गति देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पत्समृद्धिदायै नमः: जो सभी संपदाओं से समृद्धि देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदविघ्ननायै नमः: जो सभी संपदाओं के विघ्न को नाश करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदधिष्ठानयै नमः: जो सभी संपदाओं का अधिष्ठान हैं।
ॐ सर्वसम्पदविद्ये नमः: जो सभी संपदाओं की विद्या हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सद्गतिदायै नमः: जो सभी संपदाओं की सद्गति देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पत्समृद्धिदायै नमः: जो सभी संपदाओं से समृद्धि देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपन्नयै नमः: जो सभी संपदाओं से संपन्न हैं।
ॐ सर्वसम्पत्समृद्धायै नमः: जो सभी संपदाओं से समृद्ध हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखप्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदविघ्ननायै नमः: जो सभी संपदाओं के विघ्न को नाश करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदविघ्ननायै नमः: जो सभी संपदाओं के विघ्न को नाश करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपदधिनाथयै नमः: जो सभी संपदाओं की अधिष्ठात्री हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदात्रे नमः: जो सभी संपदाओं को प्रदान करती हैं।
ॐ सर्वसम्पदविघ्ननायै नमः: जो सभी संपदाओं के विघ्न को नाश करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्संपादनायै नमः: जो सभी संपदाओं का संपादन करती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्सुखदायै नमः: जो सभी संपदाओं से सुख देती हैं।
ॐ सर्वसम्पददायै नमः: जो सभी संपदाओं को देती हैं।
ॐ सर्वसम्पत्प्रियायै नमः: जो सभी संपदाओं की प्रिय हैं।

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