धर्मो रक्षति रक्षितः
जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
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महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी,स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः |अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः || अतीतः पंथानं तव च महिमा वाङ्मनसयोः,अतद्व्यावृत्त्या यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि |स कस्य स्तोत्रव्यः कतिविधगुणः कस्य विषयःपदे त्वर्वाचीने पतति न मनः कस्य न वचः || मधुस्फीता वाचः परमममृतं निर्मितवतः,तव ब्रह्मन् किं वागपि सुरगुरोर्विस्मयपदम् |मम त्वेतां वाणीं गुणकथनपुण्येन भवतः,पुनामीत्यर्थेऽस्मिन् पुरमथन बुद्धिर्व्यवसिता ||
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता, मैय्या तुम ही जग माता।सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता, मैय्या सुख संपत्ति पाता।जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि,
श्री नारायण हृदयम् स्तोत्रम् एक सिद्ध और गुप्त स्तोत्र है। इसके विषय में अधिक लोग नही जानते। इसका पाठ श्री लक्ष्मी हृदयम् स्तोत्रम् के साथ किया जाता है। जानियें श्री नारायण हृदयम् स्तोत्रम् का पाठ कैसे करें? और इसका क्या महत्व (लाभ) है? श्री नारायण हृदयम् स्तोत्रम् एक दिव्य और सच्चा स्तोत्र माना जाता है।