॥ ॐ शिव रक्षा स्तोत्र ॥

॥ ॐ शिव रक्षा स्तोत्र ॥ चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम्।अपारं परमादारं चतुर्वर्गस्य साधनम्॥1॥ गौरीविनायकयोर्वन्द्यं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रकम्।शिवं ध्यायेद्दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः॥2॥ गंगाधरं शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः।नयनें मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषणः॥3॥ घ्राणं पातु पुरारातिर्मुखं…

वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र

किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।वक्रतुण्ड महाकायसूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं…

श्री विष्णु सहस्रनाम:

भगवान श्री विष्णु के एक हजार नामों की महिमा अवर्णनीय है। इन नामों का संस्कृत रूप विष्णुसहस्रनाम के प्रतिरूप में विद्यमान है। श्री विष्णुसहस्रनाम पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य,…

श्री नृसिंह कवच: मंत्र

नृसिंह कवचम वक्ष्येऽ प्रह्लादनोदितं पुरा ।सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रवनाशनं ॥ सर्वसंपत्करं चैव स्वर्गमोक्षप्रदायकम ।ध्यात्वा नृसिंहं देवेशं हेमसिंहासनस्थितं॥ विवृतास्यं त्रिनयनं शरदिंदुसमप्रभं ।लक्ष्म्यालिंगितवामांगम विभूतिभिरुपाश्रितं ॥ चतुर्भुजं कोमलांगम स्वर्णकुण्डलशोभितं ।ऊरोजशोभितोरस्कं रत्नकेयूरमुद्रितं ॥ तप्तकांचनसंकाशं पीतनिर्मलवासनं…

श्री लक्ष्मी सुक्तम् – ॐ हिरण्यवर्णां हरिणींसुवर्णरजतस्रजाम् 

हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥१॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥२॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी…

श्री महालक्ष्मी अष्टक

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् का पाठ करने से सारे संकट एवं दरिद्रता का नाश होता है, यह इंद्र देव द्वारा माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे पद्म पुराण मे समायोजित किया…

देवी कवच – दुर्गा कवच

प्रमुख अठारह पुराणों में से एक मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत देवी कवच (दुर्गा कवच) श्री दुर्गा सप्तशती का प्रमुख हिस्सा है। इस महाफलदायिनी देवी कवच को भगवान ब्रह्मा ने ऋषि मार्कंडेय को…

सरस्वती द्वादश नाम स्तोत्र

सरस्वती त्वयं दृष्ट्या वीणापुस्तकधारिणीम्।हंसवाहसमायुक्तां विद्यादानकरी मम॥ १॥ प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती।तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी॥ २॥ पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।कौमारी सप्तमं प्रोक्ता अष्टमं ब्रह्मचारिणी॥ ३॥ नवमं…

सूर्य कवच

श्री गणेशाय नमः: शृणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।शरीरारोग्यदं दिव्यं सर्व सौभाग्यदायकम्॥1॥ दीप्तिमानं मुकुटं स्फुरन्मकरकुण्डलम्।ध्यात्वा सहस्रकिरणं स्तोत्रमेतदुदीरयेत्॥2॥ शिरो मे भास्करः पातु ललाटे भानुमण्डलम्।नेत्रे दिनमणिः पातु श्रवणे वासरेश्वरः॥3॥ घ्राणं धर्मध्वजः पातु वदनं…