Tuesday, 16 Jun, 2026

एक श्लोकी भागवत

आदौ देवकीदेविगर्भजननंगोपীগृहे वर्धनम्।मायापूतनजीवितापहरणंगोवर्धनोद्धारणम्॥ कंसच्छेदन कौरवादिहननंकुंतीसुतपालनम्।एतद्भागवतं पुराणकथितंश्रीकृष्णलीलामृतम्॥ एक श्लोकी भागवत – सरल हिंदी अर्थ: इस एक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण के पूरे जीवन की मुख्य लीलाओं का संक्षेप में वर्णन किया गया है— 👉 इस प्रकार, इस श्लोक में श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की सभी प्रमुख लीलाओं का सार बताया गया है, जिसे “श्रीकृष्ण […]

श्री नृसिंह कवच: मंत्र

नृसिंह कवचम वक्ष्येऽ प्रह्लादनोदितं पुरा ।सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रवनाशनं ॥ सर्वसंपत्करं चैव स्वर्गमोक्षप्रदायकम ।ध्यात्वा नृसिंहं देवेशं हेमसिंहासनस्थितं॥ विवृतास्यं त्रिनयनं शरदिंदुसमप्रभं ।लक्ष्म्यालिंगितवामांगम विभूतिभिरुपाश्रितं ॥ चतुर्भुजं कोमलांगम स्वर्णकुण्डलशोभितं ।ऊरोजशोभितोरस्कं रत्नकेयूरमुद्रितं ॥ तप्तकांचनसंकाशं पीतनिर्मलवासनं ।इंद्रादिसुरमौलिस्थस्फुरन्माणिक्यदीप्तिभि: ॥ विराजितपदद्वंद्वं शंखचक्रादिहेतिभि:।गरुत्मता च विनयात स्तूयमानं मुदान्वितं ॥ स्वहृतकमलसंवासम कृत्वा तु कवचम पठेतनृसिंहो मे शिर: पातु लोकरक्षात्मसंभव:।सर्वगोऽपि स्तंभवास: फालं मे रक्षतु ध्वनन ।नरसिंहो मे […]

श्री लक्ष्मी सुक्तम् – ॐ हिरण्यवर्णां हरिणींसुवर्णरजतस्रजाम् 

हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥१॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥२॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥३॥ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥४॥ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे […]

श्री महालक्ष्मी अष्टक

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् का पाठ करने से सारे संकट एवं दरिद्रता का नाश होता है, यह इंद्र देव द्वारा माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे पद्म पुराण मे समायोजित किया गया है। श्री शुभ ॥ श्री लाभ ॥ श्री गणेशाय नमः॥नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते ।शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥१॥ नमस्ते गरूडारूढे कोलासूर भयंकरी […]

देवी कवच – दुर्गा कवच

प्रमुख अठारह पुराणों में से एक मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत देवी कवच (दुर्गा कवच) श्री दुर्गा सप्तशती का प्रमुख हिस्सा है। इस महाफलदायिनी देवी कवच को भगवान ब्रह्मा ने ऋषि मार्कंडेय को सुनाया जिसमें 47 श्लोक अंतर्निहित हैं तथा 9 श्लोकों में फलश्रुति लिखित है। फलश्रुति का अर्थ होता है, इसको सुनने या पढ़ने से प्राप्त होने […]

सूर्य कवच

श्री गणेशाय नमः: शृणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।शरीरारोग्यदं दिव्यं सर्व सौभाग्यदायकम्॥1॥ दीप्तिमानं मुकुटं स्फुरन्मकरकुण्डलम्।ध्यात्वा सहस्रकिरणं स्तोत्रमेतदुदीरयेत्॥2॥ शिरो मे भास्करः पातु ललाटे भानुमण्डलम्।नेत्रे दिनमणिः पातु श्रवणे वासरेश्वरः॥3॥ घ्राणं धर्मध्वजः पातु वदनं वेदवाहनः।जिह्वां मे मानदः पातु कण्ठं मे सुरवन्दितः॥4॥ स्कन्धौ प्रभाकरः पातु वक्षः पातु जनप्रियः।पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वाङ्गं सकलेश्वरः॥5॥ सूर्यरक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्जपत्रके।दधाति यः करे तस्य वशगाः […]