Wednesday, 17 Jun, 2026

श्री शिव महिम्नः स्तोत्रं

महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी,स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः |अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः || अतीतः पंथानं तव च महिमा वाङ्मनसयोः,अतद्व्यावृत्त्या यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि |स कस्य स्तोत्रव्यः कतिविधगुणः कस्य विषयःपदे त्वर्वाचीने पतति न मनः कस्य न वचः || मधुस्फीता वाचः परमममृतं निर्मितवतः,तव ब्रह्मन् किं वागपि सुरगुरोर्विस्मयपदम् |मम त्वेतां वाणीं गुणकथनपुण्येन भवतः,पुनामीत्यर्थेऽस्मिन् पुरमथन बुद्धिर्व्यवसिता || […]

श्री शिव जी – आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, भोले हर शिव ओंकारा।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ॐ हर हर हर महादेव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ॐ हर हर हर महादेव..॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।तीनों रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ हर हर हर महादेव..॥ अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।चंदन मृगमद सोहै भोले शशिधारी […]

श्री शिव रुद्राष्टकम्

॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्।विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥1॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयम्।गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।करालं महाकालकालं कृपालं।गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्॥2॥ तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरम्।मनःभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम्।स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगंगा।लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालम्।प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालम्।प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥ प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं।अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं।भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥5॥ कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।चिदानन्दसंदोह मोहापहारी।प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥ न यावद् उमानाथ […]

॥ ॐ शिव रक्षा स्तोत्र ॥

॥ ॐ शिव रक्षा स्तोत्र ॥ चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम्।अपारं परमादारं चतुर्वर्गस्य साधनम्॥1॥ गौरीविनायकयोर्वन्द्यं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रकम्।शिवं ध्यायेद्दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः॥2॥ गंगाधरं शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः।नयनें मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषणः॥3॥ घ्राणं पातु पुरारातिर्मुखं पातु जगत्पतिः।जिह्वां वागीश्वरः पातु कण्ठं शशिकण्ठरः॥4॥ श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरंधरः।भुजौ भूभारसंहर्ता करौ पातु पिनाकधृक्॥5॥ हृदयं शंकरः पातु जठरं गिरिजापतिः।नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटिं व्याघ्राजिनाम्बरः॥6॥ […]