Wednesday, 17 Jun, 2026

नाग मन्त्र स्तोत्र:

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कंबलम्।
शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः॥

तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥


अर्थ:
अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धार्तराष्ट्र, तक्षक और कालिय – ये नौ महान नागों के नाम हैं। जो व्यक्ति इनका नित्य प्रातः और सायं स्मरण करता है, उसे विष का भय नहीं रहता और वह हर जगह विजय प्राप्त करता है।

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