॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ॥ आरती ॥आरती कीजै हनुमान लला की ।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे ।रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥अंजनि पुत्र महा बलदाई ।संतन के प्रभु सदा सहाई ॥ आरती कीजै […]
Read Moreजय लक्ष्मी रमणा – आरती
जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । रत्न जडि़त सिंहासन,अद्भुत छवि राजै ।नारद करत निराजन,घण्टा ध्वनि बाजै ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । प्रकट भये कलि कारण,द्विज को दर्श दियो ।बूढ़ा ब्राह्मण बनकर,कंचन महल कियो […]
Read Moreगणेश जी की – आरती
जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत,चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे,मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ पान चढ़े फल चढ़े,और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे,संत करें सेवा ॥ जय गणेश जय गणेश,जय […]
Read Moreॐ जय जगदीश हरे- आरती
ॐ जय जगदीश हरे,स्वामी जय जगदीश हरे ।भक्त जनों के संकट,दास जनों के संकट,क्षण में दूर करे ॥ ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ जो ध्यावे फल पावे,दुःख बिनसे मन का,स्वामी दुःख बिनसे मन का ।सुख सम्पति घर आवे,सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ […]
Read Moreश्री एक श्लोकी विष्णुसहस्रनाम
नमोस्त्वनन्ताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षी शिरोरु बाहवे । सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नमः ॥ अर्थ :
Read Moreएकश्लोकी सुन्दरकाण्ड
यस्य श्रीहनुमाननुग्रहबलात्तीर्णाम्बुधिर्लीलयालङ्कां प्राप्य निशाम्यरामदयिताम्भङ्क्त्वा वनं राक्षसान् ।अक्षादीन् विनिहत्यवीक्ष्य दशकम्दग्ध्वा पुरीं तां पुनःतीर्णान्धिः कपिभिर्युतोयमनमत् तं रामचन्द्रं भजे ॥
Read Moreएक श्लोकी भागवत
आदौ देवकीदेविगर्भजननंगोपীগृहे वर्धनम्।मायापूतनजीवितापहरणंगोवर्धनोद्धारणम्॥ कंसच्छेदन कौरवादिहननंकुंतीसुतपालनम्।एतद्भागवतं पुराणकथितंश्रीकृष्णलीलामृतम्॥ एक श्लोकी भागवत – सरल हिंदी अर्थ: इस एक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण के पूरे जीवन की मुख्य लीलाओं का संक्षेप में वर्णन किया गया है— 👉 इस प्रकार, इस श्लोक में श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की सभी प्रमुख लीलाओं का सार […]
Read Moreनाग मन्त्र स्तोत्र:
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कंबलम्।शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥ एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः॥ तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥ अर्थ:अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धार्तराष्ट्र, तक्षक और कालिय – ये नौ महान नागों के नाम हैं। जो व्यक्ति इनका नित्य प्रातः और सायं […]
Read Moreश्री शिव रुद्राष्टकम्
॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्।विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥1॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयम्।गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।करालं महाकालकालं कृपालं।गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्॥2॥ तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरम्।मनःभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम्।स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगंगा।लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालम्।प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालम्।प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥ प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं।अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं।भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥5॥ कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।चिदानन्दसंदोह मोहापहारी।प्रसीद प्रसीद […]
Read Moreनील सरस्वती स्तोत्र
घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि।भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥1॥ ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।जाड्यापहारे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥2॥ जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥3॥ सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते।सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्॥4॥ जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।मूढतां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥5॥ वं ह्रीं क्लीं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः।उग्रतारे नमो […]
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